Back for Revenge - 1 in Hindi Drama by Radhika books and stories PDF | Back for Revenge - 1

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Back for Revenge - 1

यह दुनिया बहुत बड़ी है और सबके खयालात भी अलग होते हैं, इसलिए मैंने आज कुछ अलग सोचा है, हां मानती हूं कि इस विषय में बहुत सी कहानियां और नोवेल्स होंगी मगर फिर भी एक अलग नजरिए से इस कहानी को लिखने की कोशिश करुंगी। तो चलिए शुरू करते हैं।

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एक आलिशान घर जहां एक लड़की खाना बना रही थी। उसने बड़े चाव से पक रहें लजीज खाने को देखा और फिर तभी अचानक कुछ हुआ। 


"छोड़ो मुझे, कौन हो तुम? कहां ले जा रहे हों मुझे? छोड़ो।" वही लड़की जिसे अब कुछ गुंडो ने पकड़ रखा था। वह चिल्ला रही थी मगर उसके मुंह पर टेप चिपका दिया गया। फिर उसे एक सुनसान जगह पर ले आए जहां पर उसे कुर्सी से बांध दिया गया था। ये एक वेयरहाउस था जो कई दिनों से बंद पड़ा हुआ था। ये जगह कुछ अजीब था यहां परिंदों की आवाज तक नहीं थीं।
           
फिर अचानक से दो पैर उसके सामने आये जिसे देखकर उसकी आंखें डर से थरथरा उठें। उसकी सौतेली मां जो हमेशा उसे टॉर्चर करती थी। उसके आंखों के सामने पिछले तीन सालों में हुईं घटनाएं घूमने लगी। उसके मां के जाने के बाद पापा ने उसे लाड़ प्यार से पालना शुरू कर दिया। उस समय उनके साथ एक आया रहती थी। पापा का प्यार उसे कभी मां की कमी महसूस नहीं होने देता मगर पापा बहुत उदास रहने लगें थें। तो उसी ने अपने पापा को शादी करने के लिए मनाया था और फिर एक दिन उसके पापा ने शादी कर ली। तीन चार महीने तक तो सब ठीक था पर अचानक मां ने अपना टेवर बदला और फिर शुरू हुआ नित्या के जीवन का साढ़ेसाती जो आज खत्म होने वाला था।

  नित्या की सौतेली मां एक लालची किस्म की मक्कार औरत थी जो हर शख्स को लूटने का काम करती थी और इस काम में साथ देने वाला उसका मामा था जो कि कंस से भी बुरा था। नित्या के पिता के पास काफ़ी जायदाद थी इस वजह से इन दोनों ने जायदाद अपने नाम करने के लिए नित्या को मोहरा बनाया जो उनके रास्ते का कांटा थी। 
नित्या ने एक बार अपने पापा से शिकायत भी कि मगर पापा ने कोई खास एक्शन नहीं लिया हां इतना जरूर किया था कि मां को थोड़ा सा पनिश किया था उसके बाद तो जैसे सौतेली मां ने उसे घर कि नौकरानी समझ लिया और भर भर कर काम करवाना शुरू कर दिया।

इसके बाद कई बार वह अपने पापा को उसकी सौतेली मां के जुल्मों के बारे में बताने की कोशिश कि मगर हर बार किसी न किसी वजह से वह बता नहीं पाती। एक बार तो वह घर से भाग गईं मगर इससे पापा उससे नाराज़ हो गये थें इसलिए उसने दुबारा कभी भी अपने पिता का दिल नहीं दुखाया।

अपने सौतेली मां को अपने सामने देखकर उसको ज्यादा हैरानी नहीं हुई मगर सोलह साल कि नित्या के पिछले कुछ साल डर के साये में सिमट कर रह गए थें इसलिए आज भी उसके आंखों में डर के इलावा कुछ नहीं था।

उसकी मां ने,(एक्चुअली वो मां कहलाने के लायक नहीं) उस औरत ने टेप निकालने का ऑर्डर दिया जिससे उनमें से एक गुंडे ने ऐसा ही किया और नित्या के मुंह से टेप निकाल दिया। उसकी सौतेली मां चाहती थी कि मरने से पहले नित्या अपने गिले शिकवे दूर कर ले मगर नित्या इस समय गहरे सदमे में थी।

उसने कभी भी अपनी मां के बारे में इतना ज्यादा नहीं सोचा था। पर अब वो कर भी क्या सकती थी। पिता दूर देश में बिजनेस ट्रिप पर थें। उसका कोई चाहने वाला नहीं था, वो मदद की गुहार लगाती तो किससे लगाती। 

"अरे! तुम तो डर से ठंडी पड़ गई। अब मैं इतनी भी बुरी नहीं जिससे तुम डरों?" कल्याणी ने उसके इर्द-गिर्द घूमते हुए कहा।

"मां, ऐसा मत करो। मैं कभी तुम्हें परेशान नहीं करुंगी और हमेशा कि तरह बिना कुछ सोचे आपकी हर बात मानूंगी प्लीज़ मुझे छोड़ दो।" नित्या गिड़गिड़ाईं।

"सब कुछ कर सकती हूं मगर तुम्हें छोड़ नहीं सकतीं, अगर छोड़ दिया तो मुझे तुम्हारे पापा का ये आलिशान घर और करोड़ों का कारोबार कैसे मिलेगा?" कल्याणी ने कहा। 

"मैं सब कुछ छोड़ दूंगी। सारी जायदाद आपको दे दूंगी पर मुझे मेरे पापा से दूर मत करो। प्लीज़।" नित्या के आंखों से बेबसी के आंसू निकल पड़े। 

"सॉरी पर मैं तुम्हारी आखरी इच्छा पूरी नहीं कर सकती।" इतना कहते ही कोई धारदार चीज उसके सिर पर पड़ी और वो दर्द से बिलखती हुई बेहोश हो गई। मगर थोड़ी ही देर बाद उसे सांसे नहीं आने लगी। शरीर ठंडा पड़ गया। मगर कहीं एक कोने में उसकी सांसें थम थम कर उसे जिंदा होने का एहसास दिला रहीं थी।

गुंडे उसे एक सुनसान जगह ले आये और जब उसे दफनाने वाले थे कि तभी उन्हें पता चला कि नित्या तो जिंदा है। एक आदमी जो काफी इमोशनल टाइप का था उसने उनको रोकने की कोशिश कि मगर अफसोस, किसी ने उसकी बात नहीं सुनी। पैसों कि लालच इंसान से क्या नहीं करवाता। यहां भी ऐसा ही हुआ उन्होंने बिना सोचे-समझे उसे दफ़ना दिया और चले गए।

कुछ देर बाद नित्या की आत्मा उसके शरीर से बाहर थी और वो बिलखती हुई रो रही थी तभी उसने मन में दृढ़ निश्चय किया कि भले ही वो जिंदा दफन हुईं हो मगर अपने कातिलों को जिंदा नहीं छोड़ेगी।

तभी वहां उसे कोई दिखा जो उसे ही देख रहा था। उसका रूप डरावना था, वो काले कपड़ों से लिपटा हुआ था चेहरे के स्थान पर सिर्फ धुआं था। उसके हाथों में एक अजीब सा शस्त्र था। वो पहले तो डर गई मगर तभी उसे एहसास हुआ कि मरने के बाद सबसे पहला सामना मौत से होती है। उसने कुछ नहीं कहा मगर आंखों से शिकायत झलक रही थी। तभी वहां जादू हुआ और वो यमराज के दरबार में थी। 

जहां जब यमराज ने उसके लाइफ के अच्छे और बुरे कामों का पर्चा निकाला। सोलह साल कि नित्या भला क्या ही गलत काम करती इसलिए यमराज ने उसे स्वर्ग जाने का आदेश दिया। मगर तभी नित्या ने आवाज उठाई।

"मुझे फिर से धरती पर जाना हैं, मेरा बदला अधूरा है। जब तक उनको सजा नहीं दिला देती मैं चैन से नहीं बैठ सकती।" नित्या ने कहा और यमराज मुस्कुरा दिए।

"तुम पृथ्वी पर जरुर जाओगी लेकिन उसमें कुछ दिनों का समय शेष है, मैं अपने नियमों को नहीं तोड़ सकता।" यमराज ने कहा।

"मैं भी अपने आप से किए वादे को तोड़ नहीं सकतीं इसलिए आप किसी भी हाल में मुझे धरती पर भेज दीजिए प्लीज़। आप चाहें तो भूत बनाकर भी भेज सकते हैं।" नित्या ने कहा क्योंकि वो किसी भी हाल में उन्हें चैन से तो नहीं जीने देने वाली थी। 

"अगर तुम भूत बनोगी तो तुम्हें लम्बा इंतजार करना पड़ेगा।" यमराज ने कहा।

"तो क्या हुआ मैं कर लूंगी इंतजार, भले ही मुक्ति देर से मिले लेकिन मन को शांति तो मिल ही जायेंगी।" नित्या ने धीमी सी आवाज में कहा।

बदलें की भावना में मत बहो, आने वाला जीवन तुम्हारे लिए अधिक अनुकूल है और मैं तुम्हारे बदले के लिए अपना नियम नहीं बदल सकता। 
लेकिन तुम्हारी मदद करने के लिए, मैं तुम्हें वरदान देता हूं कि तुम्हारा अगला जन्म तुम्हारे बदले के मकसद से होगा। बस तुम थोड़े दिन रुक जाओ, तुम्हारा आने वाला जीवन बेहतर होगा।" यमराज ने कहा, अभी नित्या कुछ बोलने ही वाली थी कि यमराज ने वहां खड़े बिना मुंह के काले सायो को नित्या को स्वर्ग छोड़ने का आदेश दिया और नित्या बस चिल्लाती हुई रह गई।
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 दोस्तों यह मेरी पहली कहानी है। मुझे प्लीज़ कॉमेंट करके बताइए कि आपको यह पार्ट कैसा लगा? इसे मैं एपिसोड में अपलोड करूंगी। तो मिलते हैं अगले एपिसोड में तब तक के लिए बाय 👋।